माता-पिता की देखभाल
प्रसव के बाद का मूड और मानसिक स्वास्थ्य
बेबी ब्लूज़ बनाम प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) — और दो सप्ताह की वह समयसीमा जिसे गंभीरता से लेना ज़रूरी है।
बेबी ब्लूज़ — जैसे कि रोना आना, मूड में बदलाव, और बहुत ज़्यादा घबराहट महसूस होना — पहले दो हफ्तों में 80% तक नए माता-पिता को प्रभावित करते हैं। ये चौथे या पांचवें दिन सबसे ज़्यादा होते हैं और दो हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। यह सुखद नहीं है, लेकिन यह कोई बीमारी नहीं है।
प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन), चिंता (एंग्जायटी), ओसीडी (OCD), या पीटीएसडी (PTSD) इससे अलग हैं और दो सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं। ये बच्चे के जन्म के बाद पहले साल में कभी भी हो सकते हैं (सिर्फ जन्म के तुरंत बाद नहीं), और इनमें लगातार उदासी या सुन्न महसूस होना, डरावने विचार आना, घबराहट, गुस्सा, या बच्चे से जुड़ाव महसूस न होना शामिल है।
अगर उदासी, चिंता या सुन्नपन दो सप्ताह से ज़्यादा बना रहता है — या यदि किसी भी समय आपको खुद को या बच्चे को नुकसान पहुँचाने के विचार आते हैं — तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। प्रसवोत्तर मूड विकार सामान्य हैं, इनका इलाज पूरी तरह संभव है, और ये इस बात का संकेत नहीं हैं कि आप अपने बच्चे से कितना प्यार करते हैं।
माता-पिता की देखभाल
यह सामग्री केवल जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी गर्भावस्था या शिशु की सेहत से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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