व्यवहार
बड़ी भावनाएं और इमोशनल कोचिंग
किसी भी समस्या को सुलझाने से पहले भावनाओं को नाम दें — यह एक छोटी सी आदत भविष्य संवार सकती है।
जब बच्चा बहुत ज्यादा परेशान हो या रोने लगे, तो कुछ भी ठीक करने से पहले उसकी भावना को एक नाम दें। "तुम वाकई बहुत निराश हो।" "तुम और खेलना चाहते थे और खेल बंद करना मुश्किल लग रहा है।" भावनाओं को नाम देने से वे काबू में आने लगती हैं।
इस तरह बात करने से बच्चे अपनी भावनाओं को संभालना सीखते हैं। समय के साथ, वे खुद अपनी भावनाओं को पहचानने लगेंगे, जिससे उनके गुस्से या रोने की तीव्रता और समय कम हो जाएगा। यह बदलाव धीरे-धीरे आता है — आप ऐसे बीज बो रहे हैं जो सालों में फल देंगे, दिनों में नहीं।
उनकी बात को अनसुना करने ("यह कोई बड़ी बात नहीं है") या बहुत जल्दी समाधान देने ("लो, इसके बदले यह ले लो") से बचें। ये दोनों ही तरीके बच्चे के भावनात्मक विकास में रुकावट डालते हैं। बच्चे के साथ बैठें, उनकी बात समझें, थोड़ा इंतज़ार करें और उसके बाद ही ज़रूरत पड़ने पर समस्या सुलझाने की कोशिश करें। ज्यादातर समय, सिर्फ उनकी बात को ध्यान से सुनना ही काफी होता है।
व्यवहार
यह सामग्री केवल जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी गर्भावस्था या शिशु की सेहत से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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