व्यवहार
पहली सीमाएं तय करना
लगातार और शांति से बच्चे का ध्यान भटकाना — और अपनी सख्त ना को केवल सुरक्षा से जुड़ी ज़रूरी बातों के लिए बचाकर रखना।
इस उम्र में लगातार और शांति से तय की गई सीमाएं बच्चे को सुरक्षा और खुद पर नियंत्रण रखना सिखाती हैं। छोटे बच्चे आपकी बात काटने के लिए नहीं, बल्कि यह जानने के लिए सीमाओं को परखते हैं कि उनकी हद कहाँ तक है — चीज़ों का एक जैसा होना ही उन्हें सुकून देता है।
मना करने से ज़्यादा उनका ध्यान दूसरी तरफ लगाने की कोशिश करें। कांटा बिजली के बोर्ड के लिए नहीं है — चलो इससे खाना खाते हैं। किताबें पढ़ने के लिए होती हैं, फेंकने के लिए नहीं — फेंकने के लिए यह गेंद लो। ना के साथ एक साफ़ विकल्प देने से बच्चे की ऊर्जा को सही दिशा मिलती है।
अपनी सख्त ना को केवल बहुत ज़रूरी बातों के लिए बचाकर रखें: जैसे मारना, काटना, सड़क पर दौड़ना या गर्म चीज़ों को छूना। ना का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने से इसका असर कम हो जाता है। जब आप ना कहें, तो तुरंत कार्रवाई भी करें — जैसे उन्हें गोद में उठा लें, वहां से हटा दें या वह चीज़ उनके पास से हटा दें। सिर्फ शब्द अभी छोटे बच्चे को रोकने के लिए काफी नहीं होते।
व्यवहार
यह सामग्री केवल जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी गर्भावस्था या शिशु की सेहत से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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