स्वास्थ्य
जेस्टेशनल डायबिटीज का प्रबंधन
डाइट और वॉक का सही तरीका — और जानें क्यों 90% मामले डिलीवरी के तुरंत बाद ठीक हो जाते हैं।
जेस्टेशनल डायबिटीज का पता चलना थोड़ा तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों को सिर्फ सही खान-पान और शारीरिक सक्रियता से नियंत्रित किया जा सकता है। मुख्य आदतें: हर कार्ब (कार्बोहाइड्रेट) के साथ प्रोटीन और फैट जरूर लें, खाने के बाद 10-15 मिनट टहलें, और अपने डॉक्टर के बताए अनुसार ब्लड शुगर का रिकॉर्ड रखें।
दिन भर के कार्ब्स को एक ही बार में खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके कई बार में खाएं। जूस और मीठे ड्रिंक्स से पूरी तरह परहेज करें। साबुत अनाज, बीन्स और सब्जियां सफेद ब्रेड, पास्ता या चावल की तुलना में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करती हैं — कार्ब्स की मात्रा समान होने पर भी इनसे ब्लड शुगर का स्तर बेहतर रहता है।
लगभग 90% मामलों में जेस्टेशनल डायबिटीज डिलीवरी के तुरंत बाद ठीक हो जाती है, लेकिन इससे भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। डिलीवरी के 6-12 हफ्तों के बाद और फिर हर साल ग्लूकोज टेस्ट करवाना एक जरूरी फॉलो-अप है।
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यह सामग्री केवल जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी गर्भावस्था या शिशु की सेहत से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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