दूध पिलाना
बोतल से दूध पिलाने के बुनियादी तरीके
बच्चे को थोड़ा सीधा पकड़ना, दूध का बहाव धीमा रखना और यह समझना कि बच्चे का पेट कब भर गया है।
बोतल से दूध पिलाना एक ऐसा कौशल है जिसे आप और आपका बच्चा शुरुआती हफ्तों में मिलकर सीखते हैं। बच्चे को थोड़ा सीधा पकड़ें, जिसमें उनका सिर उनके निचले हिस्से से थोड़ा ऊपर हो, और बोतल को लगभग सीधा रखें ताकि दूध तेजी से गिरने के बजाय धीरे-धीरे बहे।
हर बार दूध पिलाते समय अपनी बाजू बदलें। यह स्तनपान के दौरान साइड बदलने जैसा होता है, जिससे बच्चे को अलग-अलग दिशाओं से देखने का मौका मिलता है और आपके कंधे में अकड़न भी नहीं होती। हर कुछ मिनटों में रुककर बच्चे को डकार दिलाएं — पेट में फंसी हवा ही अक्सर उस चिड़चिड़ेपन का कारण होती है जिसे माता-पिता अक्सर कोलिक समझ लेते हैं।
जब आपका बच्चा अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ ले, मुँह बंद कर ले या उसका पूरा शरीर ढीला पड़ जाए, तो दूध पिलाना बंद कर दें — ये इस बात के पक्के संकेत हैं कि उसका पेट भर गया है। बोतल पर बनी लाइन सिर्फ एक अंदाज़ा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं। जबरदस्ती बोतल खत्म करवाने से बच्चे में पेट भरने के संकेतों को नज़रअंदाज़ करने की आदत पड़ जाती है, जो आगे चलकर बचपन में भी बनी रह सकती है।
दूध पिलाना
यह सामग्री केवल जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। अपनी गर्भावस्था या शिशु की सेहत से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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